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प्राक् इतिहास....

 जिस समय के मनुष्य के जीवन की जानकारी का कोई लिखित साक्ष्य नहीं मिलता  उसे  प्राक् इतिहास या प्रागैतिहासिक कहा जाता है।  प्राप्त अवशेषों से ही हमें उस काल के जीवन के प्रमाण मिलते हैं।  इस काल के उपलब्ध प्रमाण उनके औजार हैं, जो प्रायः पत्थरों से निर्मित है


  • होमो सेपियंस (ज्ञानी मानो ) का आविर्भाव 30 - 40 हजार वर्ष पूर्व माना जाता है।  तथा उस समय मनुष्य जंगलों में निवास करता था

  • ए . कनिंघम को प्रागैतिहासिक पुरातत्व का जनक कहा जाता है औजार की प्रकृति के आधार पर इतिहास को तीन भागों में बांटा जा सकता है - 1. पुरापाषाण काल ( पेलियोलिथिक एज )  2.  मध्य पाषाण काल (मेसोलिथिक एज)  तथा 3. नवपाषाण काल (नियोलिथिक )


  • पश्चिम उत्तर भारत के सोहन घाटी से पूरा पाषाण संस्कृति के साक्ष्य प्राप्त हुए हैं । यहाँ  स्थित चौंतरा नामक  स्थान  से हस्तकुठार तथा शल्क पाए गए हैं ।


  • नर्मदा घाटी के नरसिंहपुर,  महाराष्ट्र के नेवासा, आंध्र प्रदेश के गिदलूरकरीमपुडी  तथा तमिलनाडु के वदामदुराई आंतरिकपक्कम इत्यादि स्थानों भी पुरापाषाण कालीन अवशेष मिले हैं


  • मध्य पाषाण काल में क्वार्टसाइट के औजार तथा हथियार बनाए जाते थे । पश्चिम बंगाल में के वीर भावनपुर,  गुजरात के लंघनाज,  मध्य प्रदेश के आजमगढ़ तथा  राजस्थान की बागोर से मध्य पाषाण काल अवशेष प्राप्त हुआ


  • उत्तर पश्चिम में मेहरगढ़, उत्तर प्रदेश में कोलडिहवा,  बिहार  में चिरांद,  कश्मीर में बुर्जहोम, गुफ्फकराल तथा पूर्वोत्तर भारत में दाओजली  हैंडिंग प्रमुख नवपाषाण कालीन स्थल हैं।

  • मेहरगढ़ से कृषि का प्राचीनतम साक्ष्य प्राप्त होता है। नवपाषाण काल में ही पहिए तथा आग का आविष्कार  हुआ था  पशुपालन का प्रारंभिक  साक्ष्य मध्य पाषाण कालीन स्थल आजमगढ़ एवं बागोर से  प्राप्त होता है सर्वप्रथम कुत्ते को पालतू  बनाया तथा सबसे पहले तांबा धातु का प्रयोग का प्रयोग किया था। मनुष्य द्वारा बनाया गया पहला औजार कुल्हाड़ी था