Twitter / Facebook / Instagram                 


 भारत का इतिहास 

              प्राचीन भारत

                              

                            इतिहास के स्रोत

✔       प्राचीन भारतीय इतिहास को जानने के मुख्य तीन स्रोत है - 1. साहित्यिक स्रोत  2.   विदेशी यात्रियों के वितरण  तथा  3.  पुरातात्विक स्रोत

साहित्यिक स्रोत में - धार्मिक साहित्य एवं धर्मेन्तर  साहित्य शामिल है।  धार्मिक साहित्य के अंतर्गत- वेद,  उपनिषद  , रामायण,  महाभारत , पुराण ,  स्मृति ग्रंथ , बौध्द तथा जैन ग्रंथों को सम्मिलित किया जाता हैं ।धर्मेत्तर साहित्य मैं इतिहासिक एवं समसामयिक साहित्य जैसे - अर्थशास्त्रकथासरित्सागरमुद्राराक्षस आदि सम्मिलित किया जाता है


वेदों के संबंध ब्राह्मण एवं पुरोहित

वेद                   ब्राह्मण ग्रंथ                         पुरोहित

ऋग्वेद        -     कोशिश की और ऐतरेय     -  होतृ

यजुर्वेद        -     तेतरिया और शपथ         -   अध्वर्यु

सामवेद       -     पंचवीस और जैमिनी       -   उद् गाता

अथर्ववेद     -      गोपथ                           -   ब्रह्मा


  • मुख्य इतिहासिक ग्रंथों में अर्थशास्त्र (कौटिल्य),  राजतरंगिणी  (कल्हण)  पृथ्वीराज रासो (चंदबरदाई) हर्षचरित (बाणभट्ट)  उल्लेखनीय है


  • विदेशी यात्रियों एवं लेखको के विवरण से प्राचीन भारतीय इतिहास की जानकारी प्राप्त होती है। यूनानी - रोमन (क्लासिकल) लेखकों में टेसियस  तथा हेरोडोटस (इतिहास के पिता) का नाम उल्लेखनीय हैं


  • सिकंदर के साथ भारत आने वाले विदेशी लेखक - नियार्कस , आनेसिकिटस  तथा अरिस्टोबुलेस  थे


  • अन्य विदेशी लेखकों में मेगस्थनीज प्लूटार्क  एवं स्ट्रेबो के नाम से सम्मिलित हैं।


  • मेगस्थनीज,  सेल्यूकस का राजदूत था, जो चंद्रगुप्त मौर्य के दरबार में आया था । मेगस्थनीज की इंडिका में मौर्य योगिनी समाज एवं संस्कृत का विवरण मिलता है


  • हे्नसाँग का वृत्तान्त  सी-यू - की नाम से प्रसिध्द है ।

       

  •     फाह्यान  की रचना फोक्यू की है


  • अरबी लेखक अलबरूनी महमूद गजनी के साथ भारत आया था उसकी कृति किताब - उल -हिंद अथवा तहकीक- ए - हिंद (भारत की खोज ) में तत्कालीन भारतीय समाज की दशा वर्णन  है।


  • पुरातात्विक स्रोत मैं अभिलेख , मुद्रा,  मूर्तियां , चित्रकला एवं स्मारक आते हैं । अभिलेख शिलाओं, स्तंभों,    ताम्रपात्रों , दीवारों मुद्राओं एवं प्रतिमा आदि पर खुद है।


  • पश्चिम एशिया में बोगाज़कोई से प्राप्त सर्वाधिक प्राचीन अभिलेख (1400 ईशा पूर्व)  में चार वैदिक देवताओं इंद्र, मित्र, वरुण, नासत्य का उल्लेख मिलता है


  • बेसनगर ( विदिशा) से से प्राप्त गरुड़ स्तंभ लेख से भागवत धर्म के प्रसार का वर्णन मिलता है 


  • अन्य अभिलेखों में हाथीगुफा अभिलेख कलिंग नरेश खारवेल , प्रयाग स्तंभ लेख समुद्रगुप्त,  मंदसौर अभिलेख मालवा नरेश यशोधर्मन ,  जूनागढ़ अभिलेख रुद्रदामन , ऐहोल अभिलेख पुलकेशिन द्वितीय  आदि प्रमुख हैं।

सिक्के एवं मुद्राएं-

  • आहत सिक्के  पंचमार्क सिक्के बिना लेख के प्राचीनतम सिक्के थे।

  • सिक्कों पर नाम उत्कीर्ण  करने की परंपरा यूनानीयों से आई। हिंदू यवनाे ने सर्वप्रथम स्वर्ण सिक्के जारी किए। सर्वाधिक स्वर्ण मुद्राएं गुप्तशासन काल में जारी किए हैं।

  • समुद्रगुप्त को कुछ सिक्कों पर वीणा वादन करते हुए दिखाया गया है यज्ञ श्री सातकर्णि (सातवाहन) की मुद्रा पर जलपोत क चित्र उत्कीर्ण हैं ।

  • चंद्रगुप्त विक्रमादित्य व्याघ शैली   की मुद्राओं से शक विजय का विवरण मिला है