भारतीय संविधान

1919 ई.  भारत शासन अधिनियम  (मांटेग्यू - चेम्सफोर्ड सुधार)  इस अधिनियम की मुख्य विशेषताएं हैं। 

1.  केंद्र मैं द्विसदनात्मक विधाियका की स्थापना की गई- प्रथम राज्य परिषद तथा दूसरी केंद्र विधानसभा। राज्य परिषद में सदस्य की संख्या 60 थी । जिसमें जिसमें 34 निर्वाचित होते थे और उनका कार्यकाल 5 वर्षों का होता था । केंद्रीय विधानसभा के सदस्यों की संख्या 144 थी ,  जिनमें 104 निर्वाचित तथा 40 मनोनीत होते थे इनका कार्यकाल 3 वर्षों का था।  दोनों सदनों के अधिकार समान से  थे । इनमें सिर्फ एक अंतर था की बजट पर स्वीकृति प्रदान करने अधिकार  निचले सदन को था। 
2.  प्रांतों में द्वैध शासन प्रणाली का प्रवर्तन किया गया (प्रांतों में द्वैध शासन के जनक लियोनस कार्टियस थे)  इस योजना के अनुसार प्रांतीय विधियों को दो वर्गों में विभाजित किया गया आरक्षित तथा हस्तांतरित या आंतरिक

आरक्षित विषय  वित्त, भूमि कर , अकाल सहायता , न्याय , पुलिस , पेंशन , अपराधिक जातियाँ ,  छापाखाना,  समाचारपत्र , सिंचाई , जलमार्ग ,खान , कारखाना , बिजली , गैस , वाॅयलर , श्रमिक कल्याण ,औद्योगिक विवाद,  मोटरगाड़ियां , छोटे बंदरगाह और सार्वजनिक सेवाएंँ आदि। 

हस्तांतरित विषयम  शिक्षा , पुस्तकालय , संग्रहालय , स्थानीय स्वायत्त शासन , चिकित्सा सहायता , सार्वजनिक निर्माण विभाग , आबकारी , उद्योग , तौल  तथा माप , सार्वजनिक मनोरंजन पर नियंत्रण , धार्मिक तथा अग्रहार दान आदि

नोट आरक्षित विषयों का प्रशासन गवर्नर और उसकी कार्यकारी परिषद के माध्यम किया जाता था , जबकि हस्तांतरण विषयों का प्रशासन गवर्नर द्वारा विधान परिषद के प्रति उत्तरदाई मंत्रियों की सहायता से किया जाना था। (इस द्वैध शासन को 1935 ई. के एक्ट के द्वारा समाप्त कर दिया गया

4. भारत सचिव को अधिकार दिया गया । कि वह भारत में महालेखा परीक्षक की नियुक्ति कर सकता है । 

5. इस अधिनियम के भारत में एक लोक सेवा आयोग का गठन का प्रावधान किया । अतः1926 में ई.  में ली गई आयोग  (1923-24) की सिफारिश पर सिविल सेवकों की भर्ती के लिए केंद्रीय लोकसेवा आयोग का गठन किया गया 

6. इस अधिनियम के अनुसार वायसराय की कार्यकारी परिषद में 6 सदस्यों में से commander-in-chief को छोड़कर तीन सदस्यों को भारतीय होना आवश्यक था । 

7.  इसने संप्रदायिकता आधार सिक्खो , भारतीय ईसाइयों , आंग्ल-भारतीय और यूरोपियों के लिए भी पृथक निर्वाचन के सिद्धांत को विस्तारित कर दिया गया । 

8. इसमें पहली बार केंद्रीय बजट को राज्यों के बजट से अलग कर दिया गया । 

9.  इसके अंतर्गत एक वैधानिक आयोग का गठन किया गया जिसका कार्य 10 वर्ष बाद जांच करने के बाद अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करना था ।

10.  इस अधिनियम में केंद्रीय विधानसभा में वायसराय के अध्यादेश जारी करने की शक्तियों को निम्न रूप में बनाए रखा गया a. कुछ विषयों से संबंधित विधायकों को विचारार्थ प्रस्तुत करने के लिए उसकी पूर्व अनुमति आवश्यक थी b. उसे भारतीय विधानसभा द्वारा पारित किसी भी विधायक को वीटो करने या सम्राट की विचारों के लिए आरक्षित करने की शक्ति थी c.  उसे या शक्ति थी कि विधान मंडल द्वारा नामंजूर किया गए या पारित न किए गए किसी विधायक या अनुदान को प्रमाणित कर देते तो ऐसे प्रमाणित विधायक विधानमंडल द्वारा पारित विधायक के समान हो जाते थे d. वह आपात  स्थित में अध्यादेश बना सकता था जिनका स्थाई अवधि के लिए  विधिक  प्रभाव होता था

नोटः मांटेग्यू -चेम्सफोर्ड सुधार (भारत शासन अधिनियम 1919)  द्वारा भारत में पहली बार महिलाओं को वोट देने का अधिकार मिला उस समय इंग्लैंड का प्रधानमंत्री लाॅयड जार्ज।