👉भारत का भौतिक स्वरूप
देश के कुल क्षेत्रफल के 10.7% भाग पर उच्च पर्वत - श्रेणियां हैं, जिनकी ऊंचाई 2,135 मीटर या उससे अधिक है 305 मीटर से 2,135 मीटर की ऊंचाई वाली पहाड़िया 18.6% भू- भाग पर फैली है । 43% भू- भाग पर विस्तृत मैदान का विस्तार है।
हिमालय का प्रदेशिक विभाजन
- कुमायूं हिमालय 320 किलोमीटर सतलज एवं काली नदियों के मध्य
- नेपाल हिमालय 800 किलोमीटर काली एवं तीस्ता नदियों के मध्य
- असम हिमालय 720 किलोमीटर तीस्ता एवं देहांग नदियों के मध्य
- भौतिक रचना तथा धरातल के स्वरूप के अनुसार भारत को पांच भागों में बांटा गया है
1. उत्तरी पर्वतीय मैदान 2. विशाल मैदान 3. प्रदीपीय पठार 4. मरुस्थलीय प्रदेश व 5. समुद्र तटीय मैदान।
- भू- वैज्ञानिकों के अनुसार जहां आज हिमालय पहाड़ है वहां टिथिस नामक उथला समुद्र था
- हिमालय की उत्पत्ति के संबंध में आधुनिक सिद्धांत प्लेट विवर्तनिक है
- हिमालय की पर्वत - श्रेणियां प्रायद्वीपीय पठार की ओर उत्तल एवं तिब्बत की ओर अवतल हो गई है।
- उत्तर के पर्वतीय क्षेत्र को चार प्रमुख समांतर पर्वत श्रेणी क्षेत्रों में बांटा जा सकता है
- कश्मीर हिमालय करेवा के लिए प्रसिद्ध है, जहांँ जाफरान की खेती की जाती है करेवा चिकनी मिट्टी और दूसरे पदार्थों का हिमोढ़ पर मोटी परत के रूप में जमाव है।
- व्रहत हिमालय में जोजिला, पीर पंजाल में बनिहाल , जास्कर श्रेणी में फोटुला, लद्दाख खेड़ी में खार्द़गला जैसे दर्र स्थित हैं ।
- कश्मीर हिमालय क्षेत्र में ही मीठे जल की झील डल एवं वूलर एवं खारे जल की झील पाँगॅाग सो और सुमोरीरी स्थित है
- वैष्णो देवी , अमरनाथ गुफा और चराए-ए- शरीफ जैसी तीर्थ स्थान कश्मीर या उत्तरी पश्चिमी हिमालय में ही स्थित है
नोट व्रहत हिमालय लघु हिमालय से मेन सेंट्रल थस्ट के द्वारा अलग होती हैं
3. हिमालय श्रेणी अर्थात लघु या मध्य हिमालय.. इस श्रेणी में पीर पंजाल. धौलाधार. मसूरी. नागटिबा एवं महाभारत श्रेणियां है । बृहद व लघु हिमालय के मध्य कश्मीर घाटी, लाहौल - स्फीति, कुल्लू एवं कांगड़ा की घाटियां मिलती है । यहां अल्पाइन चरागाह है जिन्हें कश्मीर घाटी में मर्ग ( गुलमर्ग , सोनमार्ग) तथा उत्तराखंड में बुग्याल या पयार कहा जाता है । शिमला , कुल्लू , मनाली , मसूरी , दार्जिलिंग लघु हिमालय में ही है व्रहत हिमालय की घाटियों में भोटिया प्रजाति के खानाबदोश लोग कहते हैं जो ग्रीष्म ऋतु में ऊपर बुग्याल में चले जाते हैं और शरद ऋतु में ही में नीचे घाटियों में लौट आते है। प्रसिद्ध फूलों की घाटी इसी पर्वत श्रेणी में स्थित है। गंगोत्री , यमुनोत्री, केदारनाथ, बद्रीनाथ और हेमकुंड साहिब इसी इलाके में स्थित है
नोट लघु हिमालय शिवालिक से मेन बाउंड्री फॉल्ट के द्वारा अलग होती है
4. शिवालिकअर्थात निम्न या वाहृा हिमालय.. यह हिमालय का नवीनतम भाग है । शिवालिक एवं लघु हिमालय के बीच कई घाटियां हैं जैसे काठमांडू घाटी । पश्चिमी मैं इन्हें दून या द्वार कहते हैं । जैसे - देहरादून और हरिद्वार शिवालिक के निचले भाग को तराई कहते हैं।
- अरावली की पहाड़ियां राजस्थान में है । यह सबसे पुरानी चट्टानों से बनी है। इस पहाड़ी की सबसे ऊंची चोटी माउंट आबू पर स्थित गुरुशिखार है। इसकी ऊंचाई 1,722 मीटर हैं। अरावली के पश्चिम ओर से माही एवं लूनी नदी निकलती है । लूनी नदी कच्छ के रण में गायब हो जाती हैं। अरावली के पूर्व की ओर बनास की नदी से निकलती है
नोट- वैसी नदी जो जमीन में ही लुप्त हो जाती है उसे The river of ephemeralmकहते है।
- मालवा का पठार, पश्चिम मध्य प्रदेश एवं दक्षिण - पूर्व राजस्थान राज्य में है यह ज्वालामुखी के चट्टानों का बना हुआ है इससे चंबल और बेतवा नदी निकलती है।
- विंध्याचल का पठार झारखंड, उत्तर प्रदेश एवं दक्षिण - पूर्व राजस्थान राज्य में है। यहां परतदार चट्टानों का बना है। विंध्याचल पर्वतमाला उत्तर भारत को दक्षिण भारत से अलग करती है
- मैंकल पठार छत्तीसगढ़ में है। मैकाल पहाड़ी का सर्वोच्च शिखर अमरकंटक 1,036 मीटर है । या पुरानी चट्टानों का बना एक ब्लॉक पर्वत है । इसके पश्चिम की ओर से नर्मदा नदी, उत्तर की ओर से सोन नदी और दक्षिण की तरफ से महानदी निकलती है।
- छोटा नागपुर स्थित रांँची का पठार समप्राय मैदान का उदाहरण है। छोटानागपुर पठार को भारत का रूर खनिज भंडार की दृष्टि से या (भारत का सबसे संपन्न ) भी कहा जाता है।
- सतपुड़ा की पहाड़ियांँ मध्य प्रदेश राज्य में है। या ज्वालामुखी के चट्टानों से बनी हुई है। इनकी सबसे ऊंची चोटी धूपगड़ी 1,350 मीटर है। जो महादेव पर्वत पर स्थित है। इसकी पूर्वी हिस्से से ताप्ती नदी निकलती है
- पश्चिमी घाट .. यह पर्वत ताप्ती नदी के मुहाने से लेकर कन्या-कुमारी अंतरीप तक लगभग 1,600 किलोमीटर में विस्तृत है इसलिए औसत ऊंचाई 1,200 मीटर हैं । पश्चिम घाट से उत्तर में गुजरात के सौराष्ट्र प्रदेश में गिर की पहाड़िया मिलती है जो एशियाई सिंह के लिए विख्यात है। पश्चिम घाट को सहयाद्री भी कहा जाता है 16 डिग्री उत्तर उत्तरी अक्षांश रेखा जो कि गोवा से गुजरती है है सहयाद्री को दो भागों में विभाजित करती है।- उत्तरी सहयाद्री एवं दक्षिणी सहयाद्री । उत्तरी सहयाद्री के ऊपरी सतह पर बेसाल्ट लावा का निक्षेप है वहीं दक्षिणी सहयाद्री और आर्कियन युग की ग्रेनाइट तथा नीस चट्टानों से बना है। उत्तरी सहयाद्री एवं दक्षिण सहयाद्री की सर्वोच्च शिखर क्रमश कलसूबाई 1,664 मीटर एवं कुदरेमुख 1,892 मीटर है। महाबलेश्वर (1,438 मीटर) उत्तरी सह्याद्री की दूसरी प्रमुख छोटी है। महाबलेश्वर उच्चतम बिंदु विल्सन पॉइंट है। आर्थर शीट पॉइंट, नीडलहोल प्वाइंट ( एलिस एलीफेंट पॉइंट) महाबलेश्वर में ही है। महाबलेश्वर से पांच नदियां कृष्णा सावित्री वरना गायत्री एवं कोयना निकलती है।



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