1858 ई. का भारत शासन अधिनियमः इस अधिनियम की विशेषताएं हैं। 1. भारत का शासन कंपनी से लेकर ब्रिटिश क्रॉउन के हाथों में सौंपा गया। 2. भारत में मंत्री-पद की व्यवस्था की गई । 3. 15 सदस्यों की भारत परिषद का सृजन हुआ और (8 सदस्य ब्रिटिश सरकार द्वारा एवं 7 सदस्य कंपनी के निदेशक मंडल द्वारा) 4. भारतीय मामलों पर ब्रिटिश संसद की
सीधा नियंत्रण स्थापित किया गया। 5. मुगल सम्राट के पद को समाप्त कर दिया गया। 6. इस अधिनियम के द्वारा बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स तथा बोर्ड ऑफ कंट्रोल को समाप्त कर दिया गया। 7. भारत में शासन संचालन के लिए ब्रिटिश मंत्रिमंडल में एक सदस्य के रूप में भारत के राज्य सचिव ( Secretary of State for India ) की नियुक्ति की गई। वह अपने कार्यों के लिए ब्रिटिश संसद के प्रति उत्तरदाई होता था। भारत के प्रशासन पर इसका संपूर्ण नियंत्रण था। उसी का वाक्य अंतिम होता था चाहे वह नीति के विषय में हो या अन्य ब्योरे के विषय में 8. भारत में गवर्नर जनरल का नाम बदलकर वायसराय कर दिया गया अतः इस समय के गवर्नर जनरल लॉर्ड कैनिंग अंतिम गवर्नर जनरल एवं प्रथम वायसराय हुए- 1861ई. का भारत परिषद अधिनियम ः इस अधिनियम की विशेषताएं हैं- 1. गवर्नर जनरल की कार्यकारिणी परिषद का विस्तार किया गया, 2. विभागीय प्रणाली का प्रारंभ हुआ (लॉर्ड कैनिंग द्वारा), 3. गवर्नर जनरल को पहली बार अध्यादेश जारी करने की शक्ति प्रदान की गई । ऐसे अध्यादेश की अवधि मात्र छः महीने की होती थी। 4. गवर्नर जनरल को बंगाल, उत्तर-पश्चिम सीमा प्रांत और पंजाब में विधान परिषद स्थापित करने की शक्ति प्रदान की गई। 5. इसके द्वारा कानून बनाने की प्रक्रिया में भारतीय प्रतिनिधियों को शामिल करने की शुरुआत हुई वायसराय कुछ भारतीय को विस्तारित परिषद में गैर- सरकारी सदस्य के रूप में नामांकित कर सकता था।
नोटः 1862 ई. में लॉर्ड कैनिंग ने तीन भारतीयों बनारस के राजा, पटियाला के महाराजा और सर दिनकर राव को विधान परिषद में मनोनीत किया।
- 1873 ई. का अधिनियमः इस अधिनियम द्वारा यह उपबंध किया गया की ईस्ट इंडिया कंपनी को किसी भी समय भंग किया जा सकता है। 1 जनवरी 1884 ई. को ईस्ट इंडिया कंपनी को औपचारिक रूप से भंग कर दिया गया।
- साही उपाधि अधिनियम, 1876 ई ः इस अधिनियम द्वारा गवर्नर जनरल की केंद्रीय कार्यकारिणी में छठे सदस्य की नियुक्ति कर उसे लोक निर्माण विभाग का कार्य सौंपा गया । 28 अप्रैल 1870 ई. को एक घोषणा द्वारा महारानी विक्टोरिया को भारत की साग्म्राज्ञी घोषित किया गया।
- 1892 ई. भारत परिषद अधिनियमः इस अधिनियम की मुख्य विशेषताएं हैं- 1. अप्रत्यक्ष चुनाव- प्रणाली की शुरुआत हुई , 2. इसके द्वारा राजस्व एवं व्यय अथवा बजट पर बहस करने का था कार्यकारिणी से पूछने की शक्ति दी गई।
- 1909 ई. भारत परिषद नियम अधिनियम ( मार्ले मिंटो सुधार) ः 1. पहली बार मुस्लिम समुदाय के लिए पृथक प्रतिनिधित्व का उपबंध किया गया इसके अंतर्गत मुस्लिम समुदाय सदस्यों का चुनाव मुस्लिम मतदाता ही कर सकते थे ( भारत सरकार अधिनियम के तहत पहली बार विधायिका के कुछ निर्वाचित प्रतिनिधित्व की मंजूरी ) इस प्रकार इस अधिनियम ने संप्रदायिकता को वैधानिकता प्रदान की और लोड मिंटो को सांप्रदायिक निर्वाचन के जनक के रूप में जान गया 2. भारतीयों को भारत सचिव एवं गवर्नर जनरल की कार्यकारिणी परिषदों में नियुक्ति की गई। 3. केंद्रीय और प्रांतीय विधान परिषदों को पहली बार बजट पर वाद- विवाद करने सार्वजनिक हित के विषयों पर प्रस्ताव पेश करने, पूरक प्रश्न पूछने और मत देने का अधिकार मिला 4. प्रांतीय विधान परिषदों की संख्या में वृद्धि की गई 5. सत्येंद्र प्रसाद सिंहा वायसराय की कार्यपालिका परिषद के प्रथम भारतीय सदस्य बने उन्हें विधि सदस्य बनाया गया इस 6. इस अधिनियम के तहत प्रेसिडेंसी कॉर्पोरेशन , चैंबर्स ऑफ कॉमर्स, विश्वविद्यालय और जमींदारों के लिए अलग प्रतिनिधित्व का प्रावधान किया गया
नोटः 1909 ई. में लॉर्ड मार्ले इंग्लैड में भारत के राज्य सचिव थे और लॉर्ड मिंटू भारत के वायसराय थे।



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